लेखक : सन्तोष कुमार
आज मध्यप्रदेश में नारी सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं बल्कि जमीनी हकीकत बनता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उन्हें रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने तथा पारंपरिक संसाधनों को आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। इसी सोच का जीवंत उदाहरण हैं भोपाल की प्रगतिशील महिला कृषक श्रीमती प्रतिभा तिवारी जिन्होंने जैविक खेती और मिलेट आधारित उत्पादों के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है। उनकी प्राथमिकताओं में महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन, स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना और किसानों को मूल्यवर्धन की ओर प्रेरित करना शामिल है। प्रतिभा तिवारी जैसी महिलाएं इसी सोच को जमीन पर साकार करती नजर आती हैं।
वर्ष 2016 में “भूमिशा ऑर्गेनिक्स” के साथ शुरू हुई उनकी यात्रा आज एक सफल उद्यम में बदल चुकी है। उन्होंने न केवल जैविक खेती को अपनाया बल्कि मिलेट जैसे पारंपरिक अनाजों को आधुनिक उत्पादों के रूप में प्रस्तुत कर बाजार में नई संभावनाएं भी विकसित कीं। “अम्मा – द टेस्ट ऑफ ट्रेडिशन्स” जैसे ब्रांड के माध्यम से उन्होंने यह साबित किया कि यदि सही दिशा और समर्थन मिले तो स्थानीय उत्पाद भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाएं, विशेषकर प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारीकरण योजना (PMFME), ऐसे उद्यमों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं और किसानों को न केवल आर्थिक सहायता मिल रही है बल्कि उन्हें प्रशिक्षण और विपणन के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
प्रतिभा तिवारी की पहल से आज हजारों किसान जुड़े हुए हैं और सैकड़ों महिलाओं को रोजगार मिला है। यह केवल एक व्यवसाय नहीं बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन है जिसमें महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप यह मॉडल ग्रामीण विकास की नई दिशा तय कर रहा है।
आज जब उनके उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच रहे हैं और जी-20 जैसे आयोजनों में उनकी प्रस्तुति सराही जा रही है तब यह स्पष्ट होता है कि “वोकल फॉर लोकल” की सोच केवल एक अभियान नहीं बल्कि एक सफल रणनीति है। यह वही दिशा है, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार बढ़ावा दे रहे हैं।
मध्यप्रदेश में नारी शक्ति का यह उभरता स्वरूप बताता है कि सही नीतियों, नेतृत्व और समाज के सहयोग से महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं। प्रतिभा तिवारी की कहानी इसी बदलाव का प्रतीक है जो यह संदेश देती है कि जब शासन की मंशा और जनता का प्रयास एक साथ आते हैं तो विकास की नई इबारत लिखी जाती है।
नारी शक्ति वंदन के इस दौर में यह आवश्यक है कि ऐसी प्रेरक कहानियों को आगे लाया जाए ताकि अधिक से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भरता की इस यात्रा में जुड़ सकें और मध्यप्रदेश को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में अपनी भूमिका निभा सकें।

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