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कठोर कानून, करुण नेतृत्व: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मकवाना काल की मध्यप्रदेश पुलिस

*लेखक : सन्तोष कुमार* 

हर दौर की पहचान उसके नेतृत्व से होती है और मध्यप्रदेश पुलिस के लिए वर्ष 2025 ऐसा ही एक निर्णायक कालखंड बनकर सामने आया है जब सशक्त राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवेदनशील प्रशासनिक नेतृत्व ने मिलकर कानून-व्यवस्था को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्पष्ट विज़न, दृढ़ निर्णय क्षमता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की नीति के साथ डीजीपी कैलाश मकवाना के नेतृत्व में मध्यप्रदेश पुलिस ने यह सिद्ध किया है कि जब शासन और पुलिस एक साझा उद्देश्य के साथ आगे बढ़ते हैं तो परिणाम केवल आँकड़ों तक सीमित नहीं रहते बल्कि समाज के मन में भरोसे के रूप में दिखाई देते हैं।


नक्सलवाद के लंबे और जटिल संघर्ष से प्रदेश को मुक्त कराना इस कालखंड की ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज किया जाएगा। यह सफलता केवल रणनीतिक या पुलिसिया कार्रवाई का परिणाम नहीं बल्कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की स्पष्ट “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति, सुरक्षा बलों को मिला निर्भीक समर्थन और डीजीपी कैलाश मकवाना की योजनाबद्ध, ज़मीनी और मानवीय रणनीति का संयुक्त प्रतिफल है। जिन अंचलों ने वर्षों तक भय, अस्थिरता और अनिश्चितता झेली वहाँ शांति की वापसी ने यह साबित किया कि मजबूत नेतृत्व ही स्थायी समाधान का आधार बनता है।

अपराध नियंत्रण, नशे और संगठित अपराध के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई तथा साइबर अपराध जैसे आधुनिक खतरों पर तकनीकी रूप से सक्षम जवाब यह दर्शाते हैं कि मध्यप्रदेश पुलिस समय की चुनौतियों को समझते हुए स्वयं को निरंतर अपडेट कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में नशामुक्त समाज की दिशा में चलाए गए अभियानों को जिस तरह प्रशासनिक समर्थन और सामाजिक सहभागिता मिली उसने इस लड़ाई को केवल कानून प्रवर्तन तक सीमित न रखकर जनआंदोलन का स्वरूप दिया।

वहीं ‘ऑपरेशन मुस्कान’ जैसे अभियानों के माध्यम से गुमशुदा बच्चों को उनके परिवारों से मिलाना इस दौर की सबसे मानवीय उपलब्धियों में शामिल है। यह पहल केवल पुलिस की कार्यकुशलता नहीं बल्कि उस संवेदनशील शासन व्यवस्था का प्रमाण है जो नागरिक के दर्द और पीड़ा को समझने का प्रयास करती है। थानों को डर के प्रतीक से समाधान के केंद्र में बदलने की सोच, पारदर्शी कार्यप्रणाली और संवाद आधारित पुलिसिंग ने आम आदमी को यह अहसास कराया है कि पुलिस उससे दूर नहीं बल्कि उसके साथ खड़ी है।

डीजीपी कैलाश मकवाना के नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि उन्होंने पुलिस बल के भीतर भी सुधार और संतुलन पर समान रूप से ध्यान दिया। मानसिक स्वास्थ्य, प्रशिक्षण, हार्टफुलनेस और मानवीय मूल्यों पर दिया गया ज़ोर यह दर्शाता है कि मजबूत पुलिस केवल हथियारों और अधिकारों से नहीं बल्कि संतुलित सोच और संवेदनशील व्यवहार से बनती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी का नीतिगत समर्थन इस दृष्टिकोण को और मजबूती देता है जिससे पुलिस बल न केवल सक्षम, बल्कि मानवीय और उत्तरदायी बन सके।

2026 की ओर बढ़ते हुए आम नागरिक की अपेक्षाएँ केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं। वह चाहता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और डीजीपी कैलाश मकवाना के मार्गदर्शन में यह करुण और दृढ़ पुलिस व्यवस्था और अधिक सशक्त हो, महिलाएँ, बच्चे और बुज़ुर्ग हर परिस्थिति में स्वयं को सुरक्षित महसूस करें, डिजिटल दुनिया में पुलिस एक भरोसेमंद प्रहरी बनकर सामने आए और नशे व संगठित अपराध के खिलाफ लड़ाई समाज के सहयोग से और व्यापक स्तर पर लड़ी जाए।

आज मध्यप्रदेश पुलिस का यह दौर इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक नेतृत्व एक-दूसरे के पूरक बन जाएँ जब नेतृत्व आदेश देने से आगे बढ़कर विश्वास जगाने लगे, तब वर्दी डर नहीं बल्कि आश्वासन बन जाती है। यही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और डीजीपी कैलाश मकवाना के नेतृत्व वाले इस कालखंड की सबसे बड़ी पहचान है जहाँ कठोर कानून के साथ करुण नेतृत्व ने पुलिस और जनता के बीच एक नया मजबूत और मानवीय रिश्ता गढ़ा है।

*इनसेट बॉक्स*

यह कालखंड केवल कानून-व्यवस्था के आँकड़ों का नहीं बल्कि भरोसे की उस खामोश वापसी का साक्षी है जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और डीजीपी कैलाश मकवाना के नेतृत्व में वर्दी ने कठोरता के साथ संवेदना ओढ़ी, पुलिस ने शक्ति नहीं बल्कि संरक्षण का भाव जगाया और आम नागरिक ने पहली बार यह महसूस किया कि सुरक्षा कोई आदेश नहीं बल्कि एक भरोसेमंद अनुभव है। यही वह परिवर्तन है जिसने मध्यप्रदेश में पुलिस और जनता के रिश्ते को डर से निकालकर विश्वास की ज़मीन पर खड़ा कर दिया।*

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